चीफ जस्टिस के आश्वासन से हाईकोर्ट और सभी जिला अदालत चरणबद्ध तरीके से खुलेंगी, कमजोर आर्थिक स्थिति वाले वक़ीलों के चेहरे दमके

 चीफ जस्टिस के आश्वासन से हाईकोर्ट और सभी जिला अदालत चरणबद्ध तरीके से खुलेंगी, कमजोर आर्थिक स्थिति वाले वक़ीलों के चेहरे दमके.

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट और सभी जिला अदालत चरणबद्ध तरीके से खुलेंगी। इस आशय का आश्वासन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय यादव ने स्टेट बार प्रतिनिधि मंडल को दिया। इसी के साथ राज्य के कमजोर आर्थिक स्थिति वाले वक़ीलों के चेहरे दमक गए।


उल्लेखनीय है कि जिला बार जबलपुर के सचिव मनीष मिश्रा ने 17 नवंबर तक का अल्टीमेटम दिया था, 18 से आमरण अनशन की चेतावनी दी थी। उसके बाद अधिवक्ता धन्य कुमार जैन ने जनहित याचिका दायर कर दी। इसी कड़ी में स्टेट बार प्रतिनिधि मंडल ने पहल करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात की। जिसमें आश्वासन दिया गया।


22 मार्च, 2020 से एक के बाद एक माह गुजरते चले गए और हाई कोर्ट व अधीनस्थ अदालतों का लाकडाउन जस का तस रहा। इस वजह से वकीलों व पक्षकारों सहित अन्य को भारी आर्थिक क्षति हुई है। साथ ही मानसिक पीड़ा से भी गुजरना पड़ रहा है। जब एक के बाद एक अन्य क्षेत्रों को अनलॉक करके पूर्ववत कामकाज बहाली कर दी गई तो फिर अदालतों को खोलने की दिशा में साहसिक कदम से गुरेज क्यों? राज्य के कई वकील कमजोर आर्थिक स्थिति के हैं।


लगातार कोर्ट बंद रहने से उनका अस्तित्व संकट में है। आजीविका का मूल क्षेत्र हाथ से फिसलता प्रतीत होने लगा है। कई वकील डिप्रेशन में चले गए हैं। न्यायपालिका पर पहले ही लंबित मुकदमों का भारी बोझ है। लिहाजा, इतने लंबे समय में लंबित मुकदमों का बोझ और बढ़ गया है। सिर्फ महत्वपूर्ण प्रकृति के मामले वीडियो कॉफ्रेंसिंग से सुने गए। इस वजह से पहले से विचाराधीन मामले लटक गए हैं। पक्षकार और वकीलों के बीच तनाव की स्थिति बन गई है।

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